स्त्री होना..
सुनो,
अगर कहुँ मैं
कि तुम ग़ुलाब सी सही लेकिन
एक अंगार भी हो
कुछ ज़्यादा तो नहीं होगा न
कि जानती हो हक़ अपने
कि मुक़ाबला करना आता है तुम्हें
कि हर बात पर कान नहीं रखतीं
कि अड़ जाती हो जो सही है
कि प्रेम में प्रेयसी हो जाना
और जीवन-युद्ध में चंडी रूप
कि चाँद सी शीतलता और
सूरज सा दहकता तेज भी हो
कि प्रेम में समर्पण और
ज़िम्मेदारियों में संपूर्ण हो
कि महकती तो हो गुलाब सी
और हाथ में अनदेखा नश्तर भी साथ है
कि एकदम शुद्ध हँसी और
उतनी ही शुद्ध जीवन-यात्रा भी
कि पुरुष हो नहीं सकता
वो जो तुम हो; चाहकर भी
कि तुम प्रेम हो, समर्पण हो
ज़िद हो और पिघलती भी हो
कि स्त्री ही तो हो
तुम सा कोई और
हो भी तो नहीं सकता
समझता हूँ अब
एक पुरूष होकर भी
कि कितना भी कहुँ
कुछ ज़्यादा होगा भी नहीं
कि शब्द कम ही पड़ेंगे
कलम मौन ही रहेगी
कि स्त्री होना तो
ईश्वर को भी सुलभ नहीं !
असली पूजा
ये लड़की कितनी नास्तिक है ...हर रोज मंदिर के सामने से गुजरेगी मगर अंदर आकर आरती में शामिल होना तो दूर, भगवान की मूर्ति ...
-
रात बीतने को आई किन्तु वकील साहब की आँखों में नींद नहीं थी| सारी सात वे अँधेरे में ही कमरे की छत की ओर आँखें गड़ाए ताकते रहे| कभी करवट बदलत...
-
पूरा नाम - भगवतीचरण वर्मा जन्म - 30 अगस्त, 1903 उन्नाव ज़िला, उत्तर प्रदेश मृत्यु - 5 अक्टूबर, 1981 कर्म भूमि - लखनऊ कर्म-क्षेत्र - ...
-
एक राजा के दरबार मे एक अपरिचित व्यक्ति नौकरी मांगने के लीये आया। उससे उसकी शैक्षणिक योग्यता तथा विशेषता पूछी ग ई, तो वो बोला, "मैं क...